दफ़न सपने !!

सपने आँखों में सजाए,, बस सजाए।
और सारे आँखों में ही दफ़न हो गए।

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दिलों का फासला !!

मुड़कर हमने ही,,,, तुम्हें पुकारा था कई दफ़ा।
पर आवाज़, तय करे कैसे, दिलों का फासला।

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दुनिया से !!

अभी हमने कुछ सीखा नहीं है, दुनिया से,
वरना,,,,,,,,,, हम भी मतलबी हो गए होते।

जो आज,,, हमारे लिए,,, हमारे अपने हैं,
वो भी कब के,,,,,,, अजनबी हो गए होते।

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इंसान !!

रहने दो जिंदा सबको अब यहाँ,
ये सब बस,,,,, इंसान ही तो हैं।

आज हैं,,,,,,, कल चले जाएँगे,
चंद दिनों के मेहमान ही तो हैं।

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लोग !!

अपने सपनों के लिए,,,,,,,,,
दूसरों को कुचल देते हैं लोग।

फिर उन्हें मुश्किल में छोड़,
यूँ ही, आगे चल देते हैं लोग।

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